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`और क्या..` फिर मौन.. शब्द गले में अटके। उन भावों को गला स्वर भी नहीं दे पाता। चुप में सबकुछ था, जो शब्द में कहीं नहीं था। फिर जैसे शब्दों ...
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उसने कहा मुझे दो-तीन दिन से एक बात कहना थी। एक योजना है आज से चालीस-पचास साल बाद जब तुम्हारी वो गुजर जाए और मेरे यह भी मान लो नहीं रहे...
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इस समय कैसे प्रतिक्रिया दूँ, मैं क्या चाहता हूँ, मैं क्यों उदास हूँ, इसलिए की वे अब फिर साथ रहेंगे या इसलिए की उसे नई तकलीफें होगी, उसे अपने...
1 comment:
bahut achcha hain bhai
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